कॉरेनटाइन में बच्चों की बोरियत दूर करें | Do not let children get bored in Quarantine
- Vimla Sharma
- Apr 21, 2020
- 5 min read
Updated: Sep 21, 2021

यह छुटि्टयां बच्चों और हमारे परिवार को संक्रमण से सुरक्षित रखने के लिए की गई हैं। जिंदगी अनमोल है। बच्चे तो बच्चे हैं, उनकी यह शिकायत कभी खत्म नहीं होती कि ‘ममा, बोर हो रहे हैं।’ किन्तु यह बोरियत भी बच्चों के लिए अच्छी ही है। जब बच्चे बोर होंगे तो अपना खुरफाती दिमाग दौडाते हैंं। इस बोरियत से उपजी खुराफात कब कोई नई शक्ल लेकर क्रियटिव आइडिया बन जाये, कुछ कहा नहीं जा सकता। वह स्वयं कोई रास्ता निकाल ही लेते हैं।
बच्चे कभी एक जगह लगातार बैठ नहीं सकते, एक ही चीज से काफी देर तक खेल नहीं सकते। कोई भी कार्य लगातार नहीं कर सकते। मन से चंचल होते हैं। बच्चों की तरह बडे भी इन छुटिटयों से परेशान हो चुके हैं क्योंकि कुछ पाबंदियां हैं जिन्हें मानना आवश्यक हैं। यह पाबंदियां हमें, हमारे परिवार को सुरक्षित रखने के लिए लगाई गई हैं।
कोविड-19 एक ऐसा वायरस है जिसका संक्रमण बडी ही तेजी से फैल रहा है। अभी इस संक्रमण काा पूरे विश्व में कोई वैक्सीन व इलाज संभव नहीं है। घर में रहना ही इससे बचाव है। सामाजिक दूरियांं बनायें, घरों में रहें और सुरक्षित रहें।

मनुष्य की एक मानसिकता है कि जिस काम के लिए रोका जाये उसकी ओर आकर्षण बढता है। किन्तु कोविड-19 को हल्के में लेना, किसी के लिए भी जानलेवा हो सकता है। ऐसे में घर के बडों को चाहिए कि वह शिकायतें करने की बजाय, सहयोग करें, बच्चों को इस जैविक वायरस के बारे में जानकारी दें, जिससे बच्चे दोस्तों के पास जाने या बाहर खेलने के लिए परेशान न करें। बच्चे तो बच्चे हैं। यहां हम कुछ टिप्स पर चर्चा करेंगे कि आप इन कॉरेनटाइन में बच्चों को बोर होने से कैसे बचायें-

यह छुटि्टयां बच्चों और हमारे परिवार को संक्रमण से सुरक्षित रखने के लिए दी गई हैं। किन्तु बच्चे तो बच्चे हैं, परेशान हो ही जाते हैं। उनकी यह शिकायत कभी खत्म नहीं होतींं। इस समय विकल्प कम हैं। इससे पहले आप परेशान हों, यह जान लें कि यह बोरियत भी बच्चों के लिए अच्छी ही है। जब बच्चे बोर होंगे तो अपना दिमाग दौडाते हैं। इस बोरियत से उपजी खुराफात कब कोई नई शक्ल लेकर क्रियटिव आइडिया बन जाये, कुछ कहा नहीं जा सकता। बच्चों की हमेशा बनी रहने वाली इन शिकायतों का हल ढूंढना आवश्यक है। आप इस कॉरेटाइन का सदुपयोग करें। बच्चो को खेल-खेल में कुछ सिखायें।
प्रतिदिन एक टास्क लें, और रोज उस को टास्क को पूरा करें।
यह बिल्कुल भी आवश्यक नहीं कि बच्चों की हॉबी को देखते हुए ही कोई क्रियटीविटी टास्क दिया जाये, शुरूआत आप हॉबी से अवश्य कर सकते हैं। टास्क को थोडा मनोरंजक बनायें, जिससे बच्चे स्वयं ही रूचि लेने लगेंगे।
जैसे यदि बच्चों की हैंड राइटिंग यदि अच्छी नहीं है तो उस पर काम किया जा सकता है। बच्चों को रोज कुछ शब्द पर्ची पर लिखने को कहें, यदि नोट बुक आदि पर कहेेंगेे बच्चों को यह स्टडी लगेगी, इसलिए बच्चों को ध्यान हटाने के लिए कलर पेपर आदि लें। बाॅॅॅॅनस पाइंट के लिए कुछ शब्द निश्चित करें या इतने शब्द लिखने पर इतने बॉनस पॉइंट, या कुछ और भी दे सकती हैं।
बच्चों को कर्सिव राइटिंग की प्रैक्टिस करवायें। यह आप कलर पेपर या कलर पैंसिल से करवायें। यदि बच्चा छोटा है तो एक दिन में केवल एक अक्षर पर भी काम किया जा सकता है।

बच्चों को घर में डॉल, फ्लावर्स आदि बनाना सिखायें। बच्चों के लिए घर में ही एक छोटी सी हट बनायें, जहां बैठकर बच्चा स्वयं में ही मग्न हो जाये।
सुबह देर तक सोना, किसी के लिए भी लिहाज से सही नहीं है। इससे एक तो दिनचर्या प्रभावित होती है, दूसरा, स्वास्थ्य पर बुरा असर पडता है। सुबह बच्चों को जल्दी उठने के लिए प्रेरित करें। बच्चों को घर के बगीचें में ले जायें। बगीचा न हो तो टेरिस पर भी ले जा सकती हैं। वहां बच्चों को सुबह प्रकृति की सुंदरता से अवगत करायें। बच्चों से पक्षियों के लिए दाना-पानी डलवायें। स्कूल की पढाई और प्रतिदिन के कार्यों के कारण बच्चों के पास इन सबके लिए समय ही नहीं होता। सुबह जल्दी उठकर स्कूल जाना, स्कूल से थक आना, फिर स्कूल का होमवर्क। आज आपके और बच्चों के पास पर्याप्त समय है। सुबह बच्चों को मेडिटेशन, योगा आदि करायें। बच्चों को धीरे-धीरे कोई भी श्लोक, प्रार्थना, पोयम आदि याद करवायें। इससे बच्चों में सकारात्मक विचारों का विकास होगा।

बच्चों को प्रतिदिन सोते समय अपनी धर्म-संस्कृति से संबंधित कोई कहानी अवश्य सुनायें। आज यह जानकर आश्चर्य और दुख होता है कि आज के बच्चे गीता-रामायण आदि के बारे में कुछ भी नहीं जानते। अंग्रेजी स्कूलों में पढते-पढते वह अपनी सस्कृति व संस्कारों से दूर होते जा रहे है। माता-पिता बच्चों के पहले शिक्षक होते हैं। पहले शिकायत रहती थी कि समय नहीं हैं, क्या करें। अब आपके पास पर्याप्त समय हैं उसका सदुपयोग बच्चों के लिए करें।
आज यू-टयूब आदि पर सब उपलब्ध है। बच्चों को सीरियल, कार्टून, कहानियों के द्वारा बच्चों को भारतीय संस्कृति, वीर महापुरूषों, वीर गाथाओं से अवगत करायें।
यदि कुछ न कर सकें तो बच्चों को सुबह की शुरूआत प्रार्थना से करवायें। भोजन से पहले प्रतिदिन स्कूल की तरह प्रेयर करवायें, गायत्री मंत्र आदि का जाप करवायें। पहले यह हमारे घरों में नियमित रूप से होता था। धीरे-धीरे समय का पता ही नहीं चला कि कब हम इन सबसे दूर होते चले गये। भारतीय संस्कार बच्चों के लिए कवच का कार्य करते हैं, यदि बच्चों में यह एक बार बचपन में पड जायें तो हमें बाहर के बदलते माहौल की चिंता करने की आवश्यकता कम ही पडती है। नियमित अभ्यास से आप बच्चों में सकारात्मक परिणाम देखेंगे। इससे बच्चों में चिडचिडापन धीरे-धीरे कम होने लगेगा।
अभी हम बच्चों के साथ बाहर घूमने नहीं जा सकते, किन्तु सुबह-शाम गार्डनिंग में बच्चों के साथ मिलकर काम करें। गार्डन की साफ-सफाई, पौधों में पानी डालना आदि। गार्डन में किसी भी पौधे का बीज रोपित करना, फिर उसमें प्रतिदिन पानी देना, अंकुरण होते ही उसे धीरे-धीरे बढते हुए देखना, बच्चों को उत्साह से भर देगा। बच्चों को किसी भी टास्क के लिए जबरदस्ती न करें, बल्कि उन्हें इन कार्यों के लिए प्रोत्साहित करें।

बच्चों के साथ गेम अवश्य खेलें। जैसे कैरम, लूडो, क्रिकेट, बैडमिंटन, पेटिंग, क्राफ्टिंग आदि। अभी मोबाइल और टीवी आदि का कम ही उपयोग करें। इससे परिवार में दूरियां बढती हैं।
यदि आप म्यूजिक में रूचि रखती हैं तो बच्चों को तबला, गिटार, ड्रम आदि भी सिखा सकते हैं।
बच्चों के लिए प्रतिदिन खाने के लिए कुछ नया व स्वादिष्ट बनायें। यदि बच्चा बडा है तो आप बच्चों को इसमें भी शामिल कर सकती हैं। बच्चों को सैंडविच, शेक, आइसक्रीम आदि बनाना सिखायें। जब बच्चे स्वयं बनाकर खायेंगे तो खाने के प्रति उनकी रूचि भी जागेगी।
इसके अतिरिक्त बच्चों को वैदिक मैथ्स व ओरल कैलक्यूलेशन की प्रैक्टिस भी करा सकते हैं। जैसे वॉक करते हुए बच्चों को पहाडों की प्रैक्टिस आदि करायें। पोयम आदि याद करायें।
बहुत कुछ है बच्चों के साथ करने के लिए। इन सबके लिए बच्चों को समय देने की आवश्यकता है।
यदि थोडा प्रयास करें तो कॉरेनटाइन समय को घर-परिवार के लिए सकारात्मकता से भरा जा है। यह आपको आपके परिवार के नजदीक ला सकता है। आपकी और परिवार की शिकायतें दूर कर सकता है। कोशिश करें, यदि आवश्यक न हो तो फोन का प्रयोग न करें। यदि आप अपना समय बच्चों के साथ बितायेंगे तो बच्चों की बोरियत दूर होगी और आपको तनाव से मुक्ति मिलेगी। आप स्वयं भी अपनी रूचि के अनुसार कोई भी कार्य आरम्भ करते हैं। जिससे आप समयाभाव के कारण नहीं कर पा रहे थे।
घर में रहें, सुरक्षित रहें।
शुभकामनाएं
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