जब पति-पत्नी के रिश्तों की डोर डगमगाने लगती है तो पति-पत्नी एक-दूसरे की आवश्यकताओं को नजरअंदाज करना आरम्भ कर देते हैं। कोई भी रिश्ता एकतरफा नहीं चलाया जा सकता। इस विषय पर बैठकर बात करें। यदि रिश्तों में थोडी सी भी गुंजाइश बाकी है तो एक-दूसरे को सम्मान दें और आवश्यकताओं को समझें। यह भी रिश्तों को फिर से पटरी पर लाने का एक रास्ता हो सकता है।
पति-पत्नी का रिश्ता, बहुत ही पवित्र रिश्ता है। कई बार ऐसा देखा गया है कि शुरूआत में यह रिश्ता बहुत ही अच्छे तरीके से चल रहा होता है। एक दूसरे की परवाह करते हैं। एक-दूसरे को समय देते हैं किन्तु समय के साथ कडवाहट आना आरम्भ हो जाती है, और रिश्ता टूट जाता है।
ऐसा क्यों होता है?
जीवन में सभी रिश्ते महत्वपूर्ण हैं, उनमें मन-मुटाव भी होते हैं, नौंक-झौंक भी हो जाती है किन्तु जीवन को इतना प्रभावित नहीं करते। किन्तु पति-पत्नी के रिश्ते में कडवाहट आने के बाद, जीवन के प्रति सोच बदलने लगती है। इस रिश्ते में थोडी सी भी कडवाहट जीवन को बदल कर रख देती है। इंसान का जीवन के प्रति सोचने का तरीका ही बदल जाता है। यह रिश्ता, आवश्यकताओं से अधिक विश्वास पर टिका होता है। इस रिश्ते में प्यार और आकर्षण तो कुछ दिनों का ही होता है किन्तु जब विश्वास पर चोट पहुंचती है या भरोसा टूटता है तो प्यार और आकर्षण का महत्व, न के बराबर ही रह जाता है।
यदि हम कुछ बातों का ख्यान रखें तो इस प्रकार की परेशानियों से काफी हद तक बचा जा सकता है और इस रिश्ते को टूटने से बचाया जा सकता है।
इस रिश्ते में यह आवश्यक नहीं कि पार्टनर एक ही स्वभाव के हों। दोनों अलग-अलग परिवारों से आते हैं। दोनों की परवरिश अलग-अलग ढंग से हुई होती है। आज के समय में अधिकतर लव मैरिज ही होती है, या तो ऑफिस में साथ काम किया होता है या फिर पहले मिल चुके होते हैं इसके बावजूद भी जब शादी के बाद एक छत के नीचे रहते हैं तब कई आदतों का मालूम होता है। यदि ऐसा है और किसी भी आदत से परेशानी हो रही है तो एक-दूसरे की परेशानियों को समझें और एक-दूसरे के स्वभाव के अनुसार ढलने का प्रयास करें।
रिश्ते में न चलायें मनमर्जियां
जब पति-पत्नी के रिश्तों की डोर डगमगाने लगती है तो पति-पत्नी एक-दूसरे की आवश्यकताओं को नजरअंदाज करना आरम्भ कर देते हैं। कोई भी रिश्ता एकतरफा नहीं चलाया जा सकता।
इस विषय पर बैठकर बात करें। यदि रिश्तों में थोडी सी भी गुंजाइश बाकी है तो एक-दूसरे को सम्मान दें और आवश्यकताओं को समझें। यह भी रिश्तों को फिर से पटरी पर लाने का एक रास्ता हो सकता है।
छोटी-छोटी बातों पर बिफर जाना
जब मन किसी बात को लेकर परेशान होता है और उस पर खुलकर बात नहीं हो पाती तो पार्टनर छोटी-छोटी बातों को लेकर बिफर जाते हैं। कभी-कभी रिश्तों को तवज्जो न मिलने के कारण रिश्तों में तनाव बढने लगता है। इससे छोटी-छोटी बातों को लेकर झगडे शुरू हो जाते हैं। ऐसे में अगर आप चाहते हैं कि आपके रिश्ते में कोई परेशानी न आये तो सबसे पहले एक-दूसरे से अपनी समस्याओं, भावनाओं और इच्छाओं पर खुलकर बात करें। ऐसा करना इसलिए भी आवश्यक है क्योंकि रिश्तों में तनाव भी तब तक ही रहता है जब कपल्स एक-दूसरे की बातों को शेयर नहीं करते। इस रिश्ते में यह बेहद आवश्यक है कि एक-दूसरे की भावनाओं को समझें।
एक-दूसरे की गलतियां नहीं, स्वयं को भी परखें
कई बार देखा गया है कि जब पति-पत्नी के बीच कहा सुनी होती है तो वे एक-दूसरे की कमी निकालना शुरू कर देते हैं, जो कि गलत है। इसका दूसरा पहलू यह भी है कि एक-दूसरे से क्या शिकायत है वे एक-दूसरे को बता रहे हैं किन्तु समझ नहीं रहे हैं। यदि यह रिश्ता पहले से बिगडा हुआ है तो गडे मुर्दे उखाडने का कोई फायदा नहीं। इसकी बजाय इस विषय पर बात करें कि यह यदि रिश्तों में मधुरता लाना चाहते हैं और थोडी सी गुंजाइश है तो अपनी कमियों को सुधारने का प्रयास करें। एक-दूसरे के लिए स्वयं को बदलें।
यदि आप अपने रिश्तों को लेकर किसी तीसरे से बातें शेयर कर रहे हैं तो यह इस बात का संकेत है कि आपके रिश्तों में दूरियां बढ रही हैं। किसी तीसरे से बात करने की बजाय अपने रिश्तों को लेकर एक-दूसरे से खुलकर बात करें, एक दूसरे के लिए समय निकालें। वह कार्य करें जो आपके पार्टनर को पसंद हैं। किसी ऐसे स्थान पर घूमने के लिए जायें जो आपके रिश्तों में मधुरता लाने में सहायक हो आपको, आपके जीवन के मधुर पलों की याद दिला दें। इससे आप महसूस कर पायेंगे कि आप दोनों एक-दूसरे के लिए कितना बदल गये हैं, कहां गलती कर रहे हैं।
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